मुमकिन नही के मुकंमिल हो हर बात ,
नादाँ है हम ! जो सुनते रहते हैं तिफ्ल -ए -दिल के इफ़रात
Wednesday, February 21, 2007
Wednesday, February 14, 2007
Tuesday, January 30, 2007
Tuesday, January 23, 2007
Monday, December 04, 2006
इश्क कि अर्ज़ी
फुर्सत में देखियेगा हमारी अर्ज़ी को ,
शायद वो बदल पाये अपकी मर्ज़ी को ,
फिक्र - ए - यार में हम ग़मगीन समां बनाए बैठें हैं ,
फ़ज़ल - ए -खुदा के इंतज़ार में बैठें हैं
शायद वो बदल पाये अपकी मर्ज़ी को ,
फिक्र - ए - यार में हम ग़मगीन समां बनाए बैठें हैं ,
फ़ज़ल - ए -खुदा के इंतज़ार में बैठें हैं
Friday, October 27, 2006
तकदीर
नसीबों पे ये लिखा था , --2
कि किसके हाँथों होगी तकदीर मुक्कामिल ,
ए खुदा ! अपनी कलम ये किसके हंथों में दे डाली .
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