Wednesday, February 21, 2007

अरमां हज़ार

मुमकिन नही के मुकंमिल हो हर बात ,
नादाँ है हम ! जो सुनते रहते हैं तिफ्ल -ए -दिल के इफ़रात

Wednesday, February 14, 2007

उमर -ए -इश्क

इश्क ने "अज़ल " हमें कम उमर कर दिया ! --2
के अब मौत भी हमें रास ना आएगी

Tuesday, January 30, 2007

नाम

बेनाम सी कश्ती है , गुमनाम से हम है !
लफ़्ज़ों के इस खेल में , हमनाम ना कम हैं

Tuesday, January 23, 2007

आशिक

अपके ख्यालों से हमखायल है हम ,
फ़िदा हो जाएँ अपकी बातों पे , -2
ऐसे आशिक - ए -सवाल है हम

Monday, December 04, 2006

इश्क कि अर्ज़ी

फुर्सत में देखियेगा हमारी अर्ज़ी को ,
शायद वो बदल पाये अपकी मर्ज़ी को ,
फिक्र - ए - यार में हम ग़मगीन समां बनाए बैठें हैं ,
फ़ज़ल - ए -खुदा के इंतज़ार में बैठें हैं

Friday, October 27, 2006

तकदीर

नसीबों पे ये लिखा था , --2

कि किसके हाँथों होगी तकदीर मुक्कामिल ,

ए खुदा ! अपनी कलम ये किसके हंथों में दे डाली .

दीवाने हजार

हम क्या कहें , हम क्या कहें ,

उनके दिल कि बात ,

कितने कमरे हैं , और कितने हैं किरायेदार